कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी गुजरात के अहमदाबाद को दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि हरियाणा को इस बड़े खेल आयोजन का मेजबान या सह-मेजबान राज्य बनाया जाए। हुड्डा ने मंगलवार को संसद परिसर में इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन भी किया।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “हरियाणा को मिलते हैं मेडल, लेकिन गेम्स गुजरात को क्यों?” उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने पिछले डेढ़ से दो दशकों में देश को बड़ी संख्या में पदक दिलाए हैं, इसलिए खेलों से जुड़े बड़े निवेश का लाभ राज्य को मिलना चाहिए।
हुड्डा ने कहा कि भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी गर्व की बात है, लेकिन खेल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए खर्च होने वाली बड़ी राशि का इस्तेमाल हरियाणा जैसे खेल प्रतिभाओं वाले राज्य में होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के 50 प्रतिशत से अधिक पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने दिलाए हैं।
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हुड्डा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को हर राज्य को समान महत्व देते हुए ‘राजधर्म’ का पालन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े प्रोजेक्ट और सुविधाएं लगातार गुजरात की ओर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा को मेजबानी नहीं दी जा सकती तो कम से कम उसे सह-मेजबान बनाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में कॉमनवेल्थ स्पोर्ट ने अहमदाबाद को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक मेजबान घोषित किया था। यह आयोजन कॉमनवेल्थ गेम्स की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर होगा। भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में इस प्रतियोगिता की मेजबानी कर चुका है।
हाल ही में समाप्त हुए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया था। भारत ने कुल 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल रहे। लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह भारत के एकमात्र दो पदक विजेता खिलाड़ी रहे।
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