डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति पद की शुरुआत से ही यह दावा रहा है कि वह “हमेशा चलने वाले युद्धों” को खत्म करेंगे। लेकिन नए साल की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कराकस में एक सैन्य कार्रवाई के दौरान पकड़ लिया। यह कदम ट्रंप की घोषित नीति से एक बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। अब ट्रंप यह कह रहे हैं कि अमेरिका “तब तक वेनेजुएला को चलाएगा, जब तक वहां सुरक्षित, सही और न्यायसंगत सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता।”
मादुरो और उनकी पत्नी पर ड्रग्स और हथियारों से जुड़े आरोप लगाए गए हैं और उन्हें न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। वेनेजुएला की अंतरिम नेतृत्व टीम और उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इसे “सशस्त्र आक्रमण” बताते हुए देश की रक्षा करने की बात कही है। वहीं ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी सैनिकों की तैनाती से भी इनकार नहीं किया जा सकता। यह नीति अब “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” से आगे बढ़कर “मेक वेनेजुएला ग्रेट अगेन” जैसी दिखने लगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार और क्षेत्र में चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के प्रभाव को खत्म करने की रणनीति भी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला की जर्जर तेल अवसंरचना को फिर से खड़ा करेंगी।
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हालांकि, मादुरो की गिरफ्तारी के बाद भी वेनेजुएला की गहरी संस्थागत कमजोरियां और मानवीय संकट खत्म नहीं हुए हैं। इससे लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने की आशंका है। ट्रंप का यह एकतरफा और आक्रामक रुख वैश्विक व्यवस्था के लिए भी एक संदेश है कि अमेरिका क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए वैश्विक सहमति की कीमत चुकाने को तैयार है।
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