भारत और चीन ने मंगलवार को सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता की। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों में हालिया सुधार को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। यह वार्ता नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई है।
बैठक में अजीत डोभाल ने कहा कि पिछले एक साल में भारत-चीन संबंधों में आया सुधार सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने से सीधे जुड़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से संबंधों को लेकर स्पष्ट और सकारात्मक दिशा मिली है। डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान और तियानजिन में हुई बातचीत का भी उल्लेख किया।
डोभाल ने कहा कि दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को और मजबूत करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, सीमा विवाद से जुड़े मतभेद अभी भी कायम हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा से बढ़ा संपर्क
डोभाल ने कहा कि नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा की सफल शुरुआत और तीनों दर्रों से पारंपरिक सीमा व्यापार की बहाली से दोनों देशों के लोगों, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को लाभ मिला है।
वहीं, वांग यी ने आपसी संवाद बढ़ाने और विश्वास मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। वांग ने सीमा विवाद को उचित तरीके से संभालते हुए द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा लाने की उम्मीद जताई।
ब्रिक्स सम्मेलन पर नजर
12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, चीन ने अभी उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहा। अब दोनों देश संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास कर रहे हैं। विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता को इसी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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