हरियाणा में खैर (Acacia catechu) पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी को लेकर विवाद बढ़ गया है। पंचकुला जिले के असरेवाली संरक्षित वन में एक हज़ार से अधिक खैर पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी की घटनाओं के चलते जांच में दोनों वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी आपस में टकरा गए। इसके परिणामस्वरूप दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है और अब जांच एक नई समिति द्वारा की जाएगी।
17 मार्च को विनीत कुमार गर्ग, 1989 बैच के अधिकारी, जो उस समय प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और हेड ऑफ़ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) थे, ने IFS अधिकारी आर आनंद की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया। इस पैनल को कलेसर नेशनल पार्क और वन्यजीव अभयारण्य में खैर पेड़ों की अवैध कटाई सहित वन्यजीव आवास के नुकसान का आकलन करने का काम सौंपा गया था। पैनल को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।
हालांकि, दो दिन बाद विवेक सक्सेना, 1991 बैच के अधिकारी, जो उस समय प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव संरक्षक थे, ने गर्ग के आदेश को क्षेत्राधिकार के आधार पर रद्द कर दिया। उन्होंने IFS अधिकारी सुभाष चंद्र के नेतृत्व में नई जांच समिति बनाई और इसे कलेसर नेशनल पार्क, यमुनानगर में खैर पेड़ों की कटाई की जांच करने का आदेश दिया। इस समिति को भी 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।
और पढ़ें: पवार परिवार का नया सदस्य राजनीति में: अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार बने एनसीपी की शीर्ष समिति के सदस्य
इस विवाद ने हरियाणा में वन विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकार क्षेत्र के मुद्दों को उजागर किया है। अब नई समिति के निष्कर्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह वन संरक्षण और अवैध कटाई के मामलों में आगे की कार्रवाई तय करेगा।
और पढ़ें: रूस क्यूबा को तेल पहुंचाने के लिए दूसरा जहाज भेजेगा: ऊर्जा मंत्री