तकनीकी बदलावों के इस दौर में ज्ञान आधारित काम (नॉलेज वर्क) तेजी से बदल रहा है। आज जब एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नई कार्यप्रणालियों को प्रभावित कर रही है, तब प्रबंधन विचारक पीटर ड्रकर की पुरानी भविष्यवाणियां फिर से चर्चा में आ गई हैं।
पीटर ड्रकर ने अपनी वर्ष 1969 में प्रकाशित पुस्तक “द एज ऑफ डिसकंटिन्यूइटी” में कहा था कि आने वाली तकनीकी लहर उन कार्य संरचनाओं को बदल देगी, जिन्हें लोग हमेशा के लिए स्थायी मानते हैं। उनका मानना था कि तकनीक केवल काम करने के तरीके को आसान नहीं बनाएगी, बल्कि संगठनों, भूमिकाओं और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों की पूरी व्यवस्था को बदल देगी।
ड्रकर की यह सोच उस समय सामने आई जब कंप्यूटिंग जगत में बड़ी क्रांति शुरू हो रही थी। इसके करीब दो वर्ष बाद इंटेल ने वर्ष 1971 में 4004 माइक्रोप्रोसेसर लॉन्च किया, जो दुनिया का पहला व्यावसायिक रूप से उपलब्ध माइक्रोप्रोसेसर था। यह एक संपूर्ण केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (सीपीयू) को एक छोटे प्रोग्रामेबल चिप में समाहित करने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
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आज की स्थिति में एजेंटिक एआई इसी बदलाव की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है। एआई एजेंट अब केवल जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जटिल कार्यों की योजना बनाने, निर्णय लेने में सहायता करने और कई प्रक्रियाओं को स्वचालित करने में सक्षम हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी बदलाव के समय लोग अक्सर तत्काल चुनौतियों में उलझ जाते हैं और बड़े परिदृश्य को देखने से चूक जाते हैं। इसलिए समय-समय पर यह समझना जरूरी है कि तकनीक समाज, रोजगार और कार्य संस्कृति को किस दिशा में ले जा रही है।
एजेंटिक एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ कंपनियों को अपने कामकाजी ढांचे, कर्मचारियों के कौशल और प्रबंधन रणनीतियों में बदलाव करना होगा। आने वाला समय उन लोगों और संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जो तकनीक के साथ तालमेल बैठाकर नए अवसरों का लाभ उठा पाएंगे।
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