अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण पूरे मिडिल ईस्ट में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। इस बीच केंद्र सरकार ने संसद को जानकारी दी कि इस वर्ष क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 10 नाविकों सहित कुल 16 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 75 भारतीय घायल हुए हैं।
यह जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय लगातार प्रभावित भारतीयों और उनके परिवारों की सहायता में जुटा हुआ है।
मंत्री ने बताया कि संघर्ष से इतर कतर की रास लाफ़ान गैस फैसिलिटी में हुई एक अलग घटना में भी 12 भारतीयों की जान गई थी। सरकार ने संबंधित देशों के अधिकारियों के सहयोग से मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने और उनके परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई। वहीं घायल भारतीयों का स्थानीय अस्पतालों में उपचार कराया गया।
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विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर घायलों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी। साथ ही परिवारों से संपर्क, यात्रा संबंधी जानकारी और सुरक्षित भारत वापसी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।
सरकार ने बताया कि युद्ध प्रभावित नाविकों के परिवारों को डीजीएमए वेलफेयर स्कीम (सीफेयरर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी) के तहत 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) प्रदान की जाती है। आवश्यक सत्यापन के बाद यह राशि शीघ्र जारी की जाती है।
सरकार के अनुसार मिडिल ईस्ट में भारतीयों की मौत के मामले सऊदी अरब (1), कुवैत (2), ओमान (8), इराक (1) और संयुक्त अरब अमीरात (4) से सामने आए हैं। वहीं घायलों में संयुक्त अरब अमीरात (32), ओमान (24), कतर (4), कुवैत (13), सऊदी अरब (1) और इज़रायल (1) में घायल भारतीय शामिल हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि ईरान में लगभग 7,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं। फरवरी 2026 से अब तक तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 2,557 भारतीयों को आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते सुरक्षित भारत लौटने में सहायता प्रदान की है।
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