2026 एशियन गेम्स में भारत की ई-फुटबॉल पदक की उम्मीदें उस समय खत्म हो गईं, जब ग्रुप एफ मुकाबले के लिए मंगोलिया की टीम निर्धारित समय पर नहीं पहुंच सकी। भारत को 0-0 की फॉरफिट जीत दी गई, लेकिन यह परिणाम गोल अंतर के लिहाज से पर्याप्त नहीं रहा और भारतीय जोड़ी नॉकआउट चरण में जगह नहीं बना सकी।
भारत के डेनियल पटेल और चिन्मय साहू ने टूर्नामेंट की शुरुआत उज्बेकिस्तान के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ से की थी। इसके बाद उज्बेकिस्तान ने मंगोलिया को मोबाइल गेम में 6-3 और कंसोल गेम में 12-0 से हराया। इस परिणाम के बाद भारत को मंगोलिया के खिलाफ बड़े अंतर से जीत की जरूरत थी, ताकि गोल अंतर बेहतर हो सके और अगले दौर में पहुंचने की उम्मीद बनी रहे।
लेकिन आइची स्काई एक्सपो सेंटर में निर्धारित मुकाबला शुरू ही नहीं हो सका। पटेल के मुताबिक, मंगोलियाई टीम के लीडर चेक-इन समय से तीन मिनट देर से पहुंचे। इसके बाद आयोजन समिति ने भारत को 0-0 की फॉरफिट जीत दे दी।
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पटेल ने बताया कि इस फैसले से भारत का गोल अंतर शून्य रहा, जबकि उज्बेकिस्तान बेहतर गोल अंतर के कारण ग्रुप में शीर्ष पर पहुंच गया। भारत के खाते में एक जीत और एक ड्रॉ रहे, लेकिन वह सर्वश्रेष्ठ दूसरे स्थान की दो उपलब्ध जगहों के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका। ग्रुप बी से थाईलैंड (+3) और ग्रुप ए से सऊदी अरब (+2) ने जगह बनाई।
भारत ने शुरू में मुकाबला खेलने का अनुरोध करते हुए फैसले का विरोध किया। हालांकि, अधिकारियों ने नियमों के अनुसार फॉरफिट जीत देने की बात कही और पैनल जांच के लिए 500 डॉलर यानी करीब 48 हजार रुपये शुल्क की जानकारी दी। भारतीय टीम ने यह विकल्प नहीं चुना।
चिन्मय साहू ने कहा कि नियमों में देर से पहुंचने पर फॉरफिट का प्रावधान पहले से था। उन्होंने बताया कि 3-0 और 3-0 की वॉकओवर जीत मिलने पर ही भारत का गोल अंतर इतना बेहतर होता कि क्वालीफाई कर पाता।
यह नतीजा मौजूदा ई-फुटबॉल एशियन चैंपियन डेनियल पटेल के लिए भी निराशाजनक रहा। अब भारत की पदक उम्मीदें पोकेमॉन यूनाइट, लीग ऑफ लीजेंड्स और पुयो पुयो चैंपियंस टीमों पर टिकी हैं।
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