राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने शुक्रवार (13 मार्च 2026) को बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को नोटिस जारी किया। आयोग ने इन राज्यों में लापता व्यक्तियों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
आयोग ने रिपोर्टों पर संज्ञान लिया, जिनमें उल्लेख किया गया कि केवल बिहार में 2013 से हर साल 12,000 से 14,000 लापता व्यक्तियों के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। रिपोर्टों के अनुसार, लापता बच्चों में से केवल लगभग दो-तिहाई बच्चों का पता लगाया जा सका है।
NHRC ने कहा कि यह स्थिति मानवाधिकारों का उल्लंघन होने की गंभीर चिंता उत्पन्न करती है। आयोग ने राज्यों से विस्तृत विवरण मांगा है कि लापता व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि के क्या कारण हैं, इन मामलों की जांच में कितनी प्रगति है और बच्चों तथा अन्य लापता व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
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आयोग ने प्रत्येक राज्य से जवाब मांगा है कि उन्होंने इन मामलों में अपराधियों की पहचान और पकड़ के लिए कौन-कौन से उपाय किए। साथ ही यह भी पूछा गया कि लापता व्यक्तियों के परिवारों को सहायता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं।
इस नोटिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यों में लापता व्यक्तियों के मामलों की जांच प्रभावी ढंग से हो, और बच्चों व अन्य नागरिकों के मानवाधिकार सुरक्षित रहें। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि अगर राज्यों से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह आगे कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
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