पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विदेशी कर्ज लेने की मजबूरी को लेकर खुलकर स्वीकार किया है कि आर्थिक मदद मांगते समय देश को “सिर झुकाना पड़ा” और “आत्मसम्मान की कीमत पर समझौते” करने पड़े। उन्होंने कहा कि मित्र देशों से कर्ज मांगना पाकिस्तान के लिए एक अपमानजनक अनुभव रहा, लेकिन कठिन हालात में इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था।
इस्लामाबाद में शुक्रवार (30 जनवरी, 2026) को देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निर्यातकों के सम्मान में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उस दौर को याद किया, जब पाकिस्तान दिवालिया होने के कगार पर खड़ा था और कुछ विश्लेषकों ने इसे तकनीकी डिफॉल्ट की स्थिति बताया था। उन्होंने कहा, “जब हमने सत्ता संभाली, तब आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी और आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।”
शहबाज शरीफ ने 2023 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक के साथ हुई अपनी बैठक का भी उल्लेख किया, जिसके बाद आईएमएफ ने एक आर्थिक कार्यक्रम को मंजूरी दी, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन समय में मित्र देशों ने पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया। उन्होंने बताया कि सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ मिलकर उन्होंने कई देशों के नेताओं से अरबों डॉलर के कर्ज के लिए मुलाकात की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा, “जो कर्ज मांगने जाता है, उसका सिर झुका हुआ होता है। कर्ज लेने में आत्मसम्मान से समझौता करना पड़ता है।”
उन्होंने कहा कि कर्ज के साथ शर्तें भी आती हैं और कई बार बिना कारण भी कुछ मांगें पूरी करनी पड़ती हैं। पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार और कर्ज प्रबंधन के लिए चीन, सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों के साथ-साथ आईएमएफ पर काफी हद तक निर्भर है।
इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने उद्योगों को राहत देने की भी घोषणा की। उन्होंने बिजली दरों में प्रति यूनिट 4.04 पाकिस्तानी रुपये की कटौती और व्हीलिंग चार्ज को घटाकर 9 रुपये करने की बात कही। इसके अलावा निर्यात पुनर्वित्त योजना की दर 7.5% से घटाकर 4.5% करने की घोषणा की, ताकि निर्यात को बढ़ावा मिले और कारोबारी समुदाय को तत्काल राहत मिल सके।
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