केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने राइड-हेलिंग मंच रैपिडो का संचालन करने वाली कंपनी रॉपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने यह कार्रवाई भ्रामक विज्ञापन, अनुचित व्यापार व्यवहार, अनुचित अनुबंध और डार्क पैटर्न से जुड़े मामलों में की है। मामला यात्रा की बुकिंग पूरी होने से पहले यात्रियों को अधिक भुगतान के लिए प्रेरित करने से संबंधित है।
सीसीपीए ने कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर मंचों की क्षेत्रव्यापी जांच के दौरान प्री-राइड टिपिंग और गतिशील मूल्य निर्धारण से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा की। जांच में पाया गया कि रैपिडो पर बुकिंग प्रक्रिया के दौरान यात्रियों को ऐसे संदेश दिखाए गए, जिनमें कहा गया कि अधिक कीमत देने पर सवारी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। एक अन्य संदेश में बताया गया कि चालक 60 रुपये की कीमत स्वीकार नहीं कर रहे और 10, 20 या 30 रुपये अतिरिक्त जोड़ने का सुझाव दिया गया।
‘कन्फर्म शेमिंग’ पर सीसीपीए की आपत्ति
प्राधिकरण के अनुसार, रैपिडो पहले यात्री को एक किराया बताता था। उस किराये पर बुकिंग किए जाने के बाद अतिरिक्त राशि देने का विकल्प इस आधार पर सामने आता था कि चालक मूल कीमत स्वीकार नहीं कर रहे हैं। सीसीपीए ने कहा कि इससे यह गलत धारणा बन सकती है कि अधिक भुगतान करने पर ही सवारी मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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प्राधिकरण ने इस प्रक्रिया को 2023 के डार्क पैटर्न रोकथाम एवं नियमन संबंधी दिशानिर्देशों के तहत ‘कन्फर्म शेमिंग’ माना। सीसीपीए के अनुसार, ऐसे संदेश बुकिंग के दौरान उपभोक्ता पर जल्द निर्णय लेने और अतिरिक्त भुगतान करने का दबाव बना सकते हैं।
‘सेट योर प्राइस’ स्लाइडर भी जांच के दायरे में
सीसीपीए ने रैपिडो के ‘सेट योर प्राइस’ स्लाइडर की भी जांच की। प्राधिकरण के मुताबिक, कीमत बढ़ाने पर ‘सवारी मिलने की अधिक संभावना’ का संकेत हरे रंग में दिखाई देता था, जबकि कीमत घटाने पर लाल या नारंगी चेतावनी आती थी। स्लाइडर में कीमत बढ़ाने के लिए घटाने की तुलना में अधिक स्थान भी उपलब्ध था।
सीसीपीए ने इस डिजाइन को ‘इंटरफेस इंटरफेरेंस’ नामक डार्क पैटर्न माना, क्योंकि उसके अनुसार इंटरफेस का दृश्य स्वरूप उपभोक्ता को अधिक भुगतान की दिशा में प्रभावित कर सकता था।
यात्रा से पहले टिप पर सवाल
सीसीपीए ने कहा कि बुकिंग के समय दिखाया गया किराया दूरी, समय, यातायात, टोल और चालक को देय राशि जैसे कारकों को ध्यान में रखता है। ऐसे में यात्रा शुरू होने से पहले उसी सवारी के लिए अतिरिक्त राशि का सुझाव देने का औचित्य नहीं पाया गया।
प्राधिकरण ने कहा कि सामान्य तौर पर टिप सेवा मिलने के बाद स्वैच्छिक रूप से दी जाती है और इसे सेवा उपलब्ध कराने की शर्त के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। सीसीपीए ने मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 का भी हवाला दिया, जिनके तहत टिप की सुविधा यात्रा पूरी होने के बाद उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
रैपिडो ने तर्क दिया था कि टिप स्वैच्छिक थी और अतिरिक्त भुगतान नहीं करने पर भी उसका मिलान एल्गोरिदम काम करता रहता है। कंपनी ने संदेशों को चालक और यात्री के बीच वास्तविक समय की बातचीत जैसा बताया था। हालांकि, सीसीपीए ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कंपनी अतिरिक्त भुगतान से सवारी मिलने की संभावना बढ़ने का प्रमाण देने वाला आंकड़ा प्रस्तुत नहीं कर सकी।
यह कार्रवाई कैब और बाइक-टैक्सी मंचों में डार्क पैटर्न तथा यात्रा से पहले टिप संबंधी प्रक्रियाओं की सीसीपीए की व्यापक जांच का हिस्सा है। प्राधिकरण ने पहले उबर, ओला, रैपिडो और नम्मा यात्री समेत विभिन्न मंचों को दिशानिर्देशों के अनुपालन और स्व-घोषणा से संबंधित नोटिस जारी किए थे।
उपभोक्ता भ्रामक विज्ञापन, अनुचित व्यापार व्यवहार या डार्क पैटर्न से जुड़ी शिकायतें राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर दर्ज करा सकते हैं।
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