हिमाचल प्रदेश के 28 वर्षीय सेना के धावक सावन बरवाल ने शनिवार को एशियन गेम्स मैराथन में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने 42.195 किलोमीटर की दौड़ 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में पूरी की और अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह एशियन गेम्स मैराथन में भारत का 1982 के बाद पहला पदक है।
जापान के इचिटाका यामाशिता ने 2:10:49 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के पेइयू फेंग ने 2:12:13 के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया। सावन का रजत पदक भारत के लिए एशियन गेम्स मैराथन में 44 साल बाद आया है।
इससे पहले 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियन गेम्स में होसुर कुक्कप्पा सीथारन ने कांस्य पदक जीता था। सावन एशियन गेम्स में मैराथन पदक जीतने वाले भारत के चौथे एथलीट हैं। 1951 के पहले एशियन गेम्स में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सूरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक जीता था।
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सावन ने इस साल ही मैराथन में कदम रखा था। इससे पहले वह 5,000 मीटर, 10,000 मीटर और हाफ मैराथन जैसी लंबी दूरी की स्पर्धाओं में हिस्सा लेते थे। अप्रैल में उन्होंने रॉटरडैम की एनएन मैराथन में 2:11:58 का समय निकालकर शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। एशियन गेम्स में उन्होंने दोबारा राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया।
दौड़ के दौरान तापमान करीब 21 डिग्री सेल्सियस था और हल्की बारिश तथा हवा भी चल रही थी। सावन आधी दूरी तक दूसरे स्थान पर थे। 35 किलोमीटर के बाद मुकाबला तीन धावकों तक सीमित रह गया। उन्होंने 39-40 किलोमीटर तक अग्रणी समूह के साथ बने रहने और अंतिम चरण में तेज गति पकड़ने की रणनीति अपनाई।
सावन मंडी जिले के जोगिंदर नगर के रहने वाले हैं। उनके पिता कुलदीप दिल्ली में चालक रहे हैं, जबकि मां सुभद्रा देवी गृहिणी हैं। 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने बड़े भाई को ट्रैक पर अभ्यास करते देखकर दौड़ना शुरू किया था।
2019 में वह खेल कोटे से सेना में शामिल हुए। 2025 राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने 5,000 और 10,000 मीटर में स्वर्ण जीता था। शनिवार की मैराथन में भारत के दूसरे धावक कार्तिक करकेरा 2:22:41 के समय के साथ 17वें स्थान पर रहे।
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