अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आम लोगों की बढ़ती महंगाई और खर्च को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने क्रेडिट कार्ड पर लगने वाली ब्याज दरों को एक साल के लिए 10 प्रतिशत तक सीमित करने की इच्छा जताई है। यह प्रस्ताव 20 जनवरी से लागू करने की बात कही गई है, हालांकि अभी तक ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि बैंकों और क्रेडिट कार्ड कंपनियों को इस योजना का पालन करने के लिए किस तरह बाध्य किया जाएगा।
ट्रंप का यह बयान उनकी उस चुनावी प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जिसे उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान उठाया था। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अब दोबारा इस मुद्दे को सामने रखा है। ट्रंप का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों के कारण मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और इसे कम करने के लिए यह कदम जरूरी है।
हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने ट्रंप की इस घोषणा की आलोचना की है। उनका कहना है कि ट्रंप ने चुनाव अभियान के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आलोचकों का यह भी आरोप है कि केवल बयानबाजी से आम लोगों को राहत नहीं मिलेगी।
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अमेरिकी कांग्रेस में इससे पहले भी क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर सीमा तय करने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई कानून पारित नहीं हो सका है। बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों का तर्क रहा है कि ब्याज दरों पर सख्त नियंत्रण से उनके कारोबार और जोखिम प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ट्रंप के ताजा बयान के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि क्या सरकार को सीधे तौर पर वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों में दखल देना चाहिए या नहीं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस प्रस्ताव को कानूनी रूप देने के लिए कोई ठोस पहल की जाती है या यह केवल एक राजनीतिक घोषणा बनकर रह जाती है।
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