विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों को चेतावनी दी है और 32 नकली विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है, जो अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। यह सूची पिछले दो वर्षों में 60% की वृद्धि को दर्शाती है, जब 2024 में केवल 20 नकली विश्वविद्यालय थे। ये संस्थान किसी भी सरकारी नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए मान्य डिग्री देने का कानूनी अधिकार नहीं रखते।
दिल्ली: नकली संस्थानों का केंद्र
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस संकट का केंद्र बन गई है। 32 संस्थानों में से 12 सिर्फ दिल्ली में स्थित हैं। ये अक्सर रोहिणी, पीतमपुरा और दरियागंज जैसे प्रमुख इलाकों में छोटे कार्यालयों से संचालित होते हैं और वास्तविक विश्वविद्यालयों का रूप धारण करके दूरदराज से आए छात्रों को लुभाते हैं। दिल्ली में प्रमुख नामों में शामिल हैं:
- यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी
- वोकेशनल यूनिवर्सिटी
- एडीआर-सेंट्रिक जूरीडिकल यूनिवर्सिटी
- ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंसेज (AIIPHS)
- अध्यात्मिक विश्वविद्यालय
राष्ट्रीय परिदृश्य
नकली विश्वविद्यालय केवल दिल्ली तक सीमित नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में चार ऐसे संस्थान हैं, जिनमें गांधी हिंदी विद्यापीठ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में भी दो या अधिक संस्थान पाए गए हैं। राजस्थान और हरियाणा में भी एक-एक संस्था को चिन्हित किया गया है।
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UGC की चेतावनी और जांच गाइड
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने स्पष्ट किया कि ये संस्थान यूजीसी एक्ट, 1956 की धारा 22 का उल्लंघन करते हैं, जो केवल केंद्रीय या राज्य अधिनियम द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों को डिग्री देने का अधिकार देती है। छात्रों को सलाह दी गई है कि किसी भी संस्थान में नामांकन से पहले UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर उसकी मान्यता की पुष्टि करें और एआईसीटीई या एनसीटीई जैसी संस्थाओं की स्वीकृति भी जांचें।
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