संयुक्त राष्ट्र में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने संबंधी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की समीक्षा के लिए आयोजित चार सप्ताह लंबा सम्मेलन बिना किसी सहमति के समाप्त हो गया। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच अंतिम दस्तावेज पर भी सहमति नहीं बन सकी।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे वियतनाम के संयुक्त राष्ट्र राजदूत डो हुंग वियत ने घोषणा की कि एनपीटी से जुड़े 191 सदस्य देशों के बीच किसी साझा निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन पाई। उन्होंने कहा कि एक हल्के और संशोधित अंतिम दस्तावेज पर भी सभी देशों की राय एक जैसी नहीं थी।
सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंता जताई, जबकि ईरान ने अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बताया।
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विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और परमाणु हथियारों को लेकर अलग-अलग देशों की रणनीतियों के कारण सहमति बनाना कठिन हो गया है।
परमाणु अप्रसार संधि को दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक माना जाता है। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों की संख्या कम करना और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।
हालांकि सम्मेलन के बेनतीजा समाप्त होने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि प्रमुख देशों के बीच मतभेद जारी रहे तो वैश्विक परमाणु सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
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