अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के खिलाफ एक बार फिर हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई उस घटना के बाद की गई, जिसमें पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर किकू पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ड्रोन हमला हुआ। इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है, जबकि केवल दो सप्ताह पहले ही दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए एक अंतरिम समझौता किया था।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने जानकारी दी कि अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें सैन्य निगरानी ढांचा, संचार प्रणाली, वायु रक्षा ठिकाने, ड्रोन भंडारण केंद्र और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकाने शामिल थे।
सेंटकॉम के अनुसार, ईरानी बलों ने एकतरफा ड्रोन के जरिए तेल टैंकर किकू पर हमला किया था। यह टैंकर 20 लाख से अधिक बैरल कच्चे तेल से लदा हुआ था और कतर के एक तेल क्षेत्र से निकलकर संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाह की ओर जा रहा था।
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इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने दोबारा युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया, तो अमेरिका और भी बड़े सैन्य अभियान चलाने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरानी शासन को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि यदि युद्धविराम को लेकर कोई विवाद है, तो ईरान बातचीत का रास्ता अपनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों की अंतरिम अवधि में समझौते की शर्तों पर बातचीत जारी है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। साथ ही इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष समाप्त करना भी इस समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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