बिहार में कर्ज संकट से जूझते परिवारों की पुकार — हमारा दर्द चुनावी मुद्दा क्यों नहीं? देश बिहार में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कर्ज वसूली से आत्महत्याएं बढ़ीं, लेकिन यह गंभीर सामाजिक संकट चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया है। गरीब परिवार रोज़ाना ऋण जाल में फंस रहे हैं।