अभिनेता विजय की बहुप्रतीक्षित और अंतिम मानी जा रही फिल्म ‘जन नायकन’ के सेंसर प्रमाणन को लेकर जारी विवाद में मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा दायर उस रिट अपील से जुड़ा है, जिसमें एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें सीबीएफसी को फिल्म को U/A 16+ प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था।
मद्रास हाईकोर्ट की द्विसदस्यीय पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन शामिल थे, ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा। सीबीएफसी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए.आर.एल. सुंदरासन ने अपनी दलीलें पेश कीं, जबकि फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश परासरन ने अधिवक्ता विजयन् सुब्रमणियन की सहायता से पक्ष रखा।
सीबीएफसी ने अदालत में तर्क दिया कि फिल्म की कुछ सामग्री मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत पुनर्विचार योग्य है और इसी कारण उसने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील दायर की। वहीं, फिल्म निर्माताओं की ओर से कहा गया कि फिल्म की विषयवस्तु और प्रस्तुति U/A 16+ श्रेणी के मानकों के अनुरूप है और इसे अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है।
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‘जन नायकन’ अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है, जिस कारण इसे लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। सेंसर प्रमाणन में देरी के चलते फिल्म की रिलीज़ पर भी असमंजस बना हुआ है।
अब हाईकोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है, जो न केवल इस फिल्म की रिलीज़ का रास्ता साफ करेगा, बल्कि भविष्य में सेंसर बोर्ड और फिल्म निर्माताओं के बीच ऐसे विवादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।