एयर इंडिया की फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एक उड़ान को हाईजैक अलर्ट मिलने के बाद आनन-फानन में जयपुर डायवर्ट करना पड़ा। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, विमान के पायलट-इन-कमांड ने संबंधित एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को कोड 7500 ट्रांसमिट किया, जो किसी विमान में गैरकानूनी हस्तक्षेप या हाईजैक की आशंका का संकेत देने वाला अंतरराष्ट्रीय कोड माना जाता है। कोड 7500 मिलते ही एटीसी और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और विमान को तत्काल जयपुर एयरपोर्ट की ओर मोड़ने के निर्देश दिए गए। विमान के जयपुर में सुरक्षित लैंड करते ही हवाई अड्डे पर सुरक्षा का स्तर बढ़ा दिया गया और एहतियातन कई तरह के प्रोटोकॉल लागू किए गए। सुरक्षा एजेंसियों की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं और विमान की गहन जांच शुरू की गई। जयपुर एयरपोर्ट पर विमान की सघन तलाशी ली गई, यात्रियों और चालक दल से भी आवश्यक पूछताछ की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विमान में किसी तरह की कोई असामान्य या संदिग्ध गतिविधि तो नहीं हुई है। सुरक्षा जांच के दौरान विमान को तकनीकी और सुरक्षा दोनों दृष्टिकोण से परखा गया। जांच प्रक्रिया पूरी होने और सुरक्षा एजेंसियों से हरी झंडी मिलने के बाद विमान को दिल्ली के लिए रवाना होने की अनुमति दी गई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विमान में सवार यात्रियों को भी सुरक्षा कारणों से कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा, हालांकि जांच पूरी होने के बाद उड़ान ने फिर से अपनी निर्धारित यात्रा शुरू की और दिल्ली के लिए उड़ान भरी। इस तरह के कोड 7500 अलर्ट को विमानन सुरक्षा में अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर विमान में किसी अनधिकृत हस्तक्षेप या खतरे की आशंका को इंगित करता है। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी सुरक्षित हवाई अड्डे पर विमान को उतारना और संपूर्ण सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य प्रक्रिया है, ताकि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल इस घटना के पीछे के सटीक कारणों को लेकर आधिकारिक रूप से अधिक जानकारी सामने नहीं आई है। एयरलाइन और सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर किन परिस्थितियों में यह अलर्ट कोड ट्रांसमिट किया गया।
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