मुंबई की एक सिटी कोर्ट ने 2021 में हुई किशोरी ज्हान्वी कुकरेजा की हत्या के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि घटनास्थल पर बिखरे पड़े बालों के गुच्छे यह साबित करने के लिए “निर्णायक सबूत” हैं कि हत्या से पहले उस पर बेहद क्रूर हमला किया गया था। अदालत ने इस आधार पर मृतका के मित्र श्री जोगधंकर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह फैसला शनिवार को सुनाया गया, जबकि विस्तृत न्यायिक आदेश मंगलवार को सार्वजनिक किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि फोरेंसिक साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों की श्रृंखला एक-दूसरे से जुड़कर यह स्पष्ट करती है कि अपराध पूर्व नियोजित था और पीड़िता को गंभीर हिंसा का सामना करना पड़ा।
अदालत ने विशेष रूप से घटनास्थल पर मिले बालों के गुच्छों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ज्हान्वी कुकरेजा के साथ हत्या से पहले जोरदार हाथापाई और शारीरिक हमला हुआ। न्यायालय के अनुसार, यह साक्ष्य अभियोजन पक्ष के उस तर्क को मजबूत करता है कि पीड़िता को बेरहमी से पीटा गया और उसके बाद उसकी हत्या की गई।
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हालांकि, अदालत ने इस मामले में एक अन्य आरोपी और मृतका की दोस्त दीया पाडलकर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष दीया की “अपराध में संलिप्तता” को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल संदेह या नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी रेखांकित किया कि आपराधिक मामलों में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य का महत्व सर्वोपरि होता है। श्री जोगधंकर के खिलाफ प्रस्तुत सबूतों की कड़ी इतनी मजबूत थी कि उसने अदालत को दोषसिद्धि और कठोर सजा देने के लिए बाध्य किया।
यह मामला 2021 में सामने आया था और इसने शहर में व्यापक चर्चा और आक्रोश को जन्म दिया था। ज्हान्वी कुकरेजा की हत्या को लेकर लंबे समय तक जांच और सुनवाई चली, जिसके बाद अब जाकर अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया। इस फैसले को न्यायिक प्रणाली द्वारा पीड़िता के प्रति न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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