केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि देशभर के प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और शासन संबंधित संस्थाओं को, अपने आप को पुनर्निर्मित करना होगा और पुराने रूढ़िवादी मॉडल को त्यागना होगा, ताकि वे वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बने रहें।
मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने यह विचार आधुनिक प्रशासन और नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए व्यक्त किया। मंत्री ने कहा कि केवल पुराने और पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल का पालन करने से प्रशासनिक संस्थान समय के साथ पीछे रह जाएंगे और उनकी प्रासंगिकता समाप्त हो जाएगी।
जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों से अपेक्षा जताई कि वे नई सोच, डिजिटल नवाचार, नीति निर्माण की आधुनिक तकनीक और नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल सिद्धांतों तक सीमित न रखकर व्यावहारिक और अभिनव तरीके से संचालित करना आवश्यक है।
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मंत्री ने यह भी कहा कि बेहतर प्रशासनिक प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल नौकरियों के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि जिम्मेदार और दूरदर्शी अधिकारी तैयार करना है, जो बदलती परिस्थितियों में समाज और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुसार नीति और निर्णय ले सकें।
उन्होंने शासन संस्थानों के अधिकारियों और प्रशिक्षकों से अपील की कि वे बदलाव और नवाचार को अपनाएं और कर्मचारियों को ऐसे प्रशिक्षण दें जो उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाए।
जितेंद्र सिंह का मानना है कि प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान यदि समयानुसार स्वयं को अपडेट नहीं करेंगे तो वे न केवल अप्रासंगिक हो जाएंगे, बल्कि राष्ट्र के सुशासन में योगदान भी सीमित रह जाएगा।
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