अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वैश्विक आर्थिक विकास दर में लगभग 0.8 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती है। उन्होंने यह बात एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक पैनल चर्चा में कही।
जॉर्जीवा ने बताया कि आईएमएफ के शोध के अनुसार एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था को कोविड-19 महामारी से पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमारे आकलन के अनुसार एआई वैश्विक विकास को लगभग एक प्रतिशत तक बढ़ा सकता है, हम इसे 0.8 प्रतिशत मानते हैं। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक तेजी से आगे बढ़ेगी।”
उन्होंने कहा कि तेज आर्थिक विकास से अधिक अवसर और रोजगार सृजित होंगे। जॉर्जीवा ने भारत के संदर्भ में कहा कि यदि एआई का प्रभावी उपयोग किया जाए तो 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। भारत ने 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है।
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हालांकि, उन्होंने एआई से जुड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी भी दी। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगभग 40 प्रतिशत नौकरियां एआई से प्रभावित हो सकती हैं। उभरते बाजारों में भी यह आंकड़ा 40 प्रतिशत के आसपास है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में 60 प्रतिशत नौकरियों पर असर पड़ सकता है।
आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि एआई एक अवसर भी है और चुनौती भी। सही नीतियों और कौशल विकास के जरिए इसके सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाया जा सकता है, जिससे भारत सहित दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं।
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