राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सोमवार, 24 अगस्त को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे। यहां वह अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता में शामिल होंगे। दोनों देशों के बीच मंगलवार को विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं दौर की वार्ता होने वाली है।
इस बैठक को इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह वार्ता चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की संभावित योजना से पहले हो रही है। शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, उनकी यात्रा की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी उनके भारत आने को लेकर आशावादी हैं।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव पिछले कई वर्षों से प्रमुख मुद्दा रहा है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन ने बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात किए थे।
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हाल के वर्षों में सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताएं हुई हैं। इनका उद्देश्य एलएसी से सैनिकों की वापसी, सैन्य गतिरोध कम करना और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करना रहा है।
विशेष प्रतिनिधि तंत्र भारत-चीन सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने का महत्वपूर्ण मंच है। आगामी बैठक में एलएसी पर शांति, सैनिकों की तैनाती, सीमा प्रबंधन और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत लगातार कहता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की बुनियादी शर्त है। ऐसे में डोभाल की यात्रा दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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