दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को कथित धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिल्ली की अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने विस्तृत पूछताछ के लिए चार दिन की रिमांड हासिल की। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की शिकायत के आधार पर शुरू की गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, UGC की शिकायत पर सिद्दीकी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। आरोपों में फर्जीवाड़ा और वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी एक बड़े जांच अभियान का हिस्सा है और पूछताछ के दौरान और खुलासे हो सकते हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी विश्वविद्यालय की गतिविधियों को लेकर जांच तेज कर चुका था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहले भी विवादों में रही है। कुछ समय पहले यह सामने आया था कि रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए डॉ. उमर नबी यहां कार्यरत थे। उनके दो सहयोगी डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन शाहिद, जिन्हें कथित “व्हाइट कॉलर” आतंक नेटवर्क से जोड़ा गया, भी इस संस्थान से जुड़े पाए गए थे।
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इसके अलावा, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने कथित फर्जी मान्यता के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसके बाद नवंबर में विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट बंद कर दी गई थी। ED ने भी विश्वविद्यालय के फंडिंग स्रोतों और मेडिकल स्टाफ से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की।
पिछले महीने ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत हरियाणा के फरीदाबाद स्थित 54 एकड़ जमीन और इमारतों सहित करीब 140 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर दी थी।
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