भारत के स्टील क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़े एंटीट्रस्ट मामलों में से एक में, एक जांच रिपोर्ट ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकारी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) को कथित तौर पर स्टील कार्टेल से जोड़ा है। रॉयटर्स द्वारा देखी गई इस रिपोर्ट के अनुसार, इन चारों कंपनियों ने 2018 से 2023 के बीच आपसी मिलीभगत कर कीमतों की जानकारी साझा की और उत्पादन में समन्वित कटौती की।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की जांच में कहा गया है कि 28 कंपनियों ने स्टील कीमतों में मिलकर हेरफेर किया। रिपोर्ट में दर्ज है कि जांच के दौरान 2022 में हुई उद्योग छापेमारी में जब्त किए गए दर्जनों व्हाट्सऐप चैट्स की समीक्षा की गई। ये चैट “Friends of Steel”, “Tycoons” और “Steel Live Market” जैसे समूहों से संबंधित थीं। इसके साथ ही कीमतों में बदलाव, बिक्री और उत्पादन पैटर्न का विश्लेषण भी किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चारों कंपनियों के बीच “पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य” मौजूद हैं, जो उनके समन्वित प्रयासों की ओर इशारा करते हैं। ये कंपनियां भारत के स्टील बाजार के लगभग 44.4% हिस्से पर काबिज हैं।
और पढ़ें: खांसी की सिरप तस्करी मामला: यूपी पुलिस ने मुख्य आरोपी की ₹28.5 करोड़ की संपत्ति कुर्क की
हालांकि, टाटा स्टील ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से “स्पष्ट रूप से इनकार” किया है और कहा है कि वह बाजार स्थितियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से कीमत तय करती है। जेएसडब्ल्यू, सेल और आरआईएनएल ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की, जबकि जांच के दौरान उनके अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया था।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2020-21 के दौरान इन कंपनियों ने 16% से 22% तक उत्पादन में नियंत्रित कटौती की। आरआईएनएल की आंतरिक प्रस्तुतियों में भी अन्य कंपनियों की कीमतों के आधार पर अपने उत्पादों की कीमत तय करने का उल्लेख है, जिसे आयोग ने मिलीभगत की “स्पष्ट पुष्टि” बताया।
और पढ़ें: पूर्वी यूक्रेन में रूसी ड्रोन हमले में पांच वर्षीय बच्चे सहित चार की मौत