राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा किए जा रहे वार्षिक खर्च में तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी पर नियंत्रण रखने और खरीद प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की गुंजाइश समाप्त करने के लिए आंध्र प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (APERC) ने एक अहम कदम उठाने के संकेत दिए हैं। APERC के प्रभारी अध्यक्ष पी. वेंकट राम रेड्डी ने कहा है कि आयोग अगले तीन महीनों के भीतर एक विनियमन या व्यापक दिशानिर्देश जारी करेगा, जिससे डिस्कॉम की सामग्री और उपकरणों की खरीद पर कड़ा नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य डिस्कॉम की खरीद से जुड़े लेन-देन को पारदर्शी बनाना और उनमें भ्रष्टाचार की संभावनाओं को खत्म करना है। श्री रेड्डी ने कहा कि वर्तमान में डिस्कॉम द्वारा की जा रही खरीद प्रक्रियाओं में कई खामियां सामने आ रही हैं, जिससे न केवल अनावश्यक खर्च बढ़ रहा है बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका भी बनी रहती है।
प्रभारी अध्यक्ष यह बात गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को विजयवाड़ा में आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान कह रहे थे। यह सुनवाई वर्ष 2026-27 के लिए डिस्कॉम की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (Annual Revenue Requirement – ARR) याचिकाओं पर आयोजित की गई थी।
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उन्होंने बताया कि प्रस्तावित नियम या दिशानिर्देशों के तहत खरीद प्रक्रिया के प्रत्येक चरण—योजना, निविदा, मूल्यांकन और भुगतान—पर स्पष्ट नियम तय किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी खरीद प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से हों।
APERC का मानना है कि यदि डिस्कॉम की खरीद प्रक्रियाओं में सुधार किया जाता है, तो इससे उनके वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार होगा और अंततः इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा, क्योंकि अनावश्यक खर्च कम होने से बिजली दरों पर दबाव घट सकता है।
श्री रेड्डी ने यह भी संकेत दिया कि आयोग उपभोक्ता संगठनों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेकर इन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देगा, ताकि यह व्यवस्था व्यावहारिक और प्रभावी साबित हो सके।
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