असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने म्यांमार से राज्य में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए सामने आए नए रास्ते को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि तस्करी का नया गलियारा म्यांमार से अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले होते हुए असम के तिनसुकिया तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मादक पदार्थों की तस्करी मुख्य रूप से म्यांमार से मणिपुर के मोरेह मार्ग के जरिए होती थी। अब तस्करों ने नया रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है। हाल में गिरफ्तार किए गए कुछ तस्करों से पूछताछ के दौरान इस नए मार्ग की जानकारी सामने आई।
सरमा ने इसे ऊपरी असम के लिए “बहुत चिंताजनक संकेत” बताया और कहा कि इस नए गलियारे पर लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
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उन्होंने बताया कि राज्य में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। हाल के हफ्तों में करीब 80 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए, जिन्हें पंजाब ले जाने की तैयारी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
सरमा ने कहा कि तस्करी के रास्ते बदल सकते हैं, लेकिन सरकार का संकल्प नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि हर ड्रग नेटवर्क को खोजकर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एक अधिकारी के मुताबिक, म्यांमार में बने नशीले पदार्थ अरुणाचल प्रदेश की सीमा से भारत में प्रवेश कर रहे हैं और अब चांगलांग एक महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में सामने आया है। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने भी अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टिलवेल रोड, जो असम को म्यांमार और चीन से जोड़ती है, अपने दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्र के कारण पहले भी अवैध गतिविधियों तथा नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए चिंता का विषय रही है।
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