असम सरकार पर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के वन्यजीव गलियारों में निर्माण गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगा है। समिति ने करीब चार साल पहले राज्य सरकार से इन क्षेत्रों में हुए निर्माण कार्यों की जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
मार्च 2022 में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति यानी सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने असम के मुख्य सचिव से बिना देरी किए रिपोर्ट देने को कहा था। समिति ने काजीरंगा के नौ वन्यजीव गलियारों में की गई उन सभी गतिविधियों की सूची मांगी थी, जो सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल 2019 के आदेश का उल्लंघन करती हों।
समिति ने केवल गलियारों तक ही जानकारी सीमित नहीं रखी थी। उसने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व के आसपास निर्धारित 10 किलोमीटर के डिफॉल्ट इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) के भीतर किए गए निर्माण कार्यों का ब्योरा भी मांगा था।
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वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, काजीरंगा के ये गलियारे हाथियों, गैंडों और अन्य जंगली जानवरों के आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा उत्पन्न हो सकती है और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समिति द्वारा मांगी गई जानकारी का उद्देश्य यह पता लगाना था कि संरक्षित क्षेत्र और उसके आसपास के संवेदनशील गलियारों में नियमों का उल्लंघन कर कोई निर्माण तो नहीं हुआ।
हालांकि, मार्च 2022 में भेजे गए नोटिस के वर्षों बाद भी असम सरकार की ओर से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मामले में कब विस्तृत जवाब देती है।
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