असम (Assam) के चाय बगानों में बांस की खेती को जगह दी जा रही है, ताकि बायोएथेनॉल प्लांट (Bioethanol Plant) को ईंधन मिल सके। इस परियोजना का मूल्य लगभग 4,930 करोड़ रुपये है और इसे नुमालिगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (Numaligarh Refinery Limited) द्वारा फिनलैंड की कंपनियों के सहयोग से बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह कदम असम के 803 बड़े चाय बागानों और 1.22 लाख पंजीकृत छोटे चाय उत्पादकों के लिए राहत का कारण बन सकता है। इन किसानों को पिछले कुछ समय से खेती और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।
अगस्त 2022 में सरकार ने असम भूमि अधिग्रहण सीमा अधिनियम 1956 (Assam Fixation of Ceiling on Land Holding Act 1956) में संशोधन किया, जिससे चाय बगानों को अपनी जमीन का 5% तक गैर-चाय उपयोग के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति मिली।
और पढ़ें: महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख के टिपू सुलतान-छत्रपति शिवाजी बयान पर विवाद, सीएम फडणवीस ने की कड़ी आलोचना
इन बगानों में से कुछ, जो दुनिया के पहले वाणिज्यिक पैमाने पर 2G बायोएथेनॉल प्लांट के 300 किलोमीटर के दायरे में हैं, बांस की खेती के लिए इस अनुमति का उपयोग कर रहे हैं। यह प्लांट बांस को फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करेगा और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का उत्पादन करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से न केवल बायोएथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि चाय बागानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और किसानों को नई आय के स्रोत मिलेंगे। साथ ही, यह असम में सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
बांस की खेती के इस प्रयोग से यह भी उम्मीद की जा रही है कि क्षेत्र में कृषि विविधता बढ़ेगी और किसानों को लंबे समय तक स्थायी लाभ मिलेगा।
और पढ़ें: नए डेटा संरक्षण कानून को RTI अधिकार कम करने वाला बताया, सुप्रीम कोर्ट में याचिका 16 फरवरी को सुनी जाएगी