समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान को एक मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसल लाला द्वारा दायर की गई आपराधिक अपील को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा आज़म खान को बरी किए जाने का आदेश बरकरार रखा गया है।
आज़म खान के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि अदालत ने फैसल लाला की अपील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अपील खारिज होने के बाद ट्रायल कोर्ट का 18 दिसंबर 2025 का फैसला यथावत प्रभावी रहेगा और उनके मुवक्किल को इस मामले में राहत मिल गई है।
यह मामला वर्ष 2019 का है। आरोप था कि 29 मार्च 2019 को आज़म खान ने अपने कार्यालय में चार सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इस घटना के संबंध में 2 अप्रैल 2019 को रामपुर कोतवाली में फैसल लाला ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
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मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर 18 दिसंबर 2025 को आज़म खान को दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद फैसल लाला ने इस फैसले को चुनौती देते हुए स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी।
अब स्पेशल कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही माना है। इस निर्णय के बाद आज़म खान को इस मामले में कानूनी राहत मिल गई है। हालांकि, उनके खिलाफ अन्य मामलों की सुनवाई अलग-अलग अदालतों में जारी है।
इस फैसले को समाजवादी पार्टी के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से कई मामलों का सामना कर रहे आज़म खान को इस प्रकरण में अदालत से राहत मिली है। वहीं, इस फैसले के बाद फैसल लाला की ओर से आगे उच्च न्यायालय का रुख किया जाएगा या नहीं, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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