इंग्लैंड की क्रिकेट लीग द हंड्रेड के लिए सनराइजर्स लीड्स ने पाकिस्तान के लेग स्पिनर अबरार अहमद को 1,90,000 पाउंड में अपनी टीम में शामिल किया है। गुरुवार, 12 मार्च को हुए इस ऑक्शन के बाद यह फैसला काफी चर्चा में आ गया, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से भारतीय मालिकों वाली टीमों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों में निवेश करने से दूरी बनाई हुई थी।
नीलामी के दौरान सनराइजर्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी काव्या मारन और टीम के मुख्य कोच डेनियल वेटोरी मौजूद थे। टीम ने बोली लगाकर अबरार अहमद को अपने साथ जोड़ा। हालांकि इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने नाराजगी जाहिर की। कुछ लोगों ने तो आईपीएल के दौरान सनराइजर्स हैदराबाद के बहिष्कार तक की मांग कर दी।
सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि बीसीसीआई का विदेशी लीगों में होने वाले फैसलों पर कोई अधिकार नहीं है।
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राजीव शुक्ला ने कहा कि बीसीसीआई का अधिकार क्षेत्र केवल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) तक सीमित है। उन्होंने बताया कि विदेशों में होने वाली लीगों में टीमों के मालिक निजी तौर पर फैसले लेते हैं और बीसीसीआई इसमें हस्तक्षेप नहीं करता।
उन्होंने कहा, “हमारा दायरा सिर्फ आईपीएल तक है। विदेश की किसी लीग में कोई टीम किस खिलाड़ी को साइन करती है, इसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह फ्रेंचाइजी का फैसला होता है।”
वहीं सनराइजर्स लीड्स के प्रबंधन ने भी अबरार अहमद को टीम में शामिल करने के पीछे क्रिकेट से जुड़ी वजह बताई। टीम के कोच डेनियल वेटोरी ने कहा कि नीलामी में उनकी पहली पसंद आदिल राशिद थे, लेकिन जब उन्हें नहीं मिल पाया तो टीम ने विदेशी स्पिनर विकल्पों की ओर रुख किया।
वेटोरी ने बताया कि टीम के पास चार-पांच स्पिनरों की सूची थी, जिनमें अबरार अहमद भी शामिल थे और आखिरकार उन्हें टीम में शामिल किया गया।
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