बिहार के लखीसराय जिले में आयोजित NEET UG 2026 री-एग्जाम के दौरान बड़े स्तर पर नकल गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। कड़ी सुरक्षा और सात-स्तरीय निगरानी व्यवस्था के बावजूद परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थियों के शामिल होने का मामला सामने आया, जिसके बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को गिरफ्तार किया है।
जांच के दौरान यह सामने आया कि ये लोग असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दे रहे थे। अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी और सत्यापन अभियान के दौरान इन गिरफ्तारियों को अंजाम दिया गया। इसके अलावा बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए जिम्मेदार एक निजी एजेंसी के 7 कर्मचारियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कई आरोपी खुद को मेडिकल छात्र बता रहे हैं। कुछ आरोपियों के पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH), अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (ANMMCH), गया और दिल्ली के कुछ मेडिकल संस्थानों से जुड़े होने का दावा सामने आया है।
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जांच एजेंसियों के अनुसार, एक आरोपी की पहचान अर्पित राज, जो ANMMCH, गया का चौथे वर्ष का एमबीबीएस छात्र बताया जा रहा है, के रूप में हुई है। उससे पूछताछ जारी है।
यह परीक्षा लखीसराय जिले के चार केंद्रों—केन्द्रीय विद्यालय किऊल, सरकारी हाई स्कूल हसनपुर, केआरके हाई स्कूल और डीआईईटी लखीसराय—में आयोजित की गई थी। जांच के दौरान कई जगहों पर फोटो और फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने पर शक गहराया, जिसके बाद फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी बायोमेट्रिक जांच में खामियों का फायदा उठाकर परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने में सफल रहे। इसी आधार पर निजी एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
अधिकारियों को शक है कि इसके पीछे एक अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग सक्रिय हो सकता है, जो पैसे लेकर परीक्षा दिलवाने का काम करता है। फिलहाल मोबाइल, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
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