पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा सांसद दिलीप घोष की सक्रिय राजनीति में वापसी के संकेत मिल रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी उन्हें फिर से संगठन में अहम भूमिका देने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह ने खुद दिलीप घोष से संपर्क कर उन्हें दोबारा पार्टी की मुख्यधारा में लाने की पहल की है।
61 वर्षीय दिलीप घोष बंगाल की राजनीति के जाने-माने चेहरों में से एक हैं और राज्य में बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। अपने बेबाक बयानों के कारण वे कई बार विवादों में भी रहे हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में बीजेपी को बंगाल में वह राजनीतिक बढ़त मिली, जो पहले कभी नहीं देखी गई थी। बंगाल उन राज्यों में शामिल रहा है, जहां बीजेपी की आक्रामक धार्मिक राष्ट्रवाद की राजनीति को लगातार खारिज किया जाता रहा है।
हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों और महीनों से दिलीप घोष राजनीति में अपेक्षाकृत निष्क्रिय नजर आ रहे थे। लेकिन अब बीजेपी की चुनावी तैयारियों के साथ उनकी वापसी लगभग तय मानी जा रही है। पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ लगातार चौथी हार से बचना चाहती है।
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सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने हाल ही में कोलकाता दौरे के दौरान एक होटल में दिलीप घोष से करीब आठ मिनट तक एकांत में मुलाकात की। बातचीत के दौरान शाह ने उनसे पूछा कि पार्टी की स्थिति कैसी है। इस पर घोष ने कथित तौर पर जवाब दिया, “जनता उत्साहित है, लेकिन पार्टी नहीं।”
यह आकलन बीजेपी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व साफ कर चुका है कि ममता बनर्जी के खिलाफ एक और हार स्वीकार्य नहीं होगी। इसी वजह से अमित शाह ने दिलीप घोष को नए प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया है। दोनों नेताओं को राज्य की हर लोकसभा सीट पर जनसभाएं करने को कहा गया है।
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