विक्रम रंधावा के एक बयान ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के इस विधायक ने विधानसभा में कहा कि कश्मीर घाटी से आए लोग जम्मू शहर में अवैध रूप से जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद कई राजनीतिक दलों, खासकर सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान बोलते हुए विधायक ने दावा किया कि कश्मीर घाटी के निवासी जम्मू में जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) की जमीन पर अतिक्रमण कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करने और अवैध कब्जों को हटाने की मांग की।
इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। विपक्षी दलों ने इसे विभाजनकारी और क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जम्मू-कश्मीर में पहले से मौजूद संवेदनशील हालात को और जटिल बना सकते हैं।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर रहते आए हैं और किसी भी समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस मुद्दे पर जिम्मेदारी से काम लिया जाए और शांति बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
वहीं बीजेपी के कुछ नेताओं ने विधायक के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है तो उसकी जांच और कार्रवाई जरूरी है। उनका कहना है कि यह प्रशासनिक मुद्दा है और कानून के अनुसार समाधान किया जाना चाहिए।
इस विवाद ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में जमीन और बसावट से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
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