कानून छात्रों की परीक्षा को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से जुड़ी राहत को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई एकमुश्त सुरक्षा केवल अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा तक सीमित नहीं है।
अदालत के अनुसार, यह सुरक्षा शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान छूटी किसी भी सेमेस्टर-अंत परीक्षा पर लागू होगी। इस फैसले से उन कानून छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो विभिन्न कारणों से संबंधित परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सके थे।
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यह आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रियाज छागला और न्यायमूर्ति फरहान दुबाश की खंडपीठ ने पुणे स्थित इंडियन लॉ सोसाइटी (आईएलएस) कॉलेज के छात्रों की ओर से दायर याचिका पर सुनाया।
मामला सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की व्याख्या से जुड़ा था, जिसमें उन कानून छात्रों को एक बार की विशेष सुरक्षा प्रदान की गई थी, जिन्हें परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था। छात्रों के बीच इस बात को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि सुप्रीम कोर्ट की राहत केवल अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए है या इसका लाभ अन्य सेमेस्टर की परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाने वाले छात्रों को भी मिलेगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे की व्याख्या करते हुए कहा कि एकमुश्त सुरक्षा का लाभ 2025-26 शैक्षणिक सत्र में छूटी किसी भी सेमेस्टर-अंत परीक्षा के मामले में लिया जा सकता है।
अदालत की इस व्याख्या को कानून के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे उन विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल सकता है, जो निर्धारित परिस्थितियों के कारण अपनी सेमेस्टर-अंत परीक्षा नहीं दे पाए थे।
फैसले का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित होने से बचाना और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई विशेष राहत का व्यापक और उचित तरीके से पालन सुनिश्चित करना है।
यह आदेश कानून की पढ़ाई कर रहे उन छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिनकी 2025-26 सत्र की कोई सेमेस्टर परीक्षा छूट गई थी। अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट की एकमुश्त सुरक्षा के तहत राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
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