डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से गंभीर होता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में इबोला से मरने वालों की संख्या 2,000 के पार पहुंच गई है। इनमें से 1,000 से अधिक मौतें पिछले करीब 20 दिनों में हुई हैं। इससे संक्रमण की तेज रफ्तार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार तक कांगो के पांच प्रांतों में इबोला के 4,381 मामलों की पुष्टि हो चुकी थी। इनमें 2,011 लोगों की मौत शामिल है। इसे वर्ष 2014 से 2016 के बीच पश्चिमी अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप के बाद सबसे बड़े प्रकोपों में से एक बताया जा रहा है। उस दौरान 11,310 लोगों की मौत हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ इबोला समन्वयक जूलियन हार्नीस ने कहा कि पिछले 20 दिनों में हुई बड़ी संख्या में मौतें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने राहतकर्मियों, सरकारों, संगठनों, दानदाताओं और स्थानीय समुदायों से मिलकर तत्काल प्रयास तेज करने की अपील की।
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इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इबोला के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है। संगठन ने स्थानीय प्रसूति वार्ड को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने के लिए 20 बेड उपलब्ध कराए हैं।
डब्ल्यूएचओ ने 100 स्वच्छता कर्मियों, 100 निगरानी एवं संक्रमण रोकथाम अधिकारियों, चार संक्रमणमुक्ति टीमों और दो अंतिम संस्कार टीमों को प्रशिक्षण भी दिया है।
कांगो के लीटा में डब्ल्यूएचओ द्वारा बनाए गए उपचार केंद्र की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। केंद्र में पहले 40 बेड थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 80 किया जाएगा। इस अभियान में कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ यूनिसेफ, एलीमा, विश्व खाद्य कार्यक्रम और मोनुस्को जैसे मानवीय संगठन सहयोग कर रहे हैं।
इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण की निगरानी, मरीजों के उपचार और संक्रमित क्षेत्रों में जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बीमारी को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।
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