महिला आरक्षण और परिसीमन (डिलिमिटेशन) को एक साथ जोड़ने के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार इस विषय को इतनी जल्दबाजी में क्यों आगे बढ़ा रही है और इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या है।
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि महिला आरक्षण का कभी भी किसी ने विरोध नहीं किया है और यह सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि अब इसे बार-बार उठाने का कोई औचित्य नहीं है।
कुमारी सैलजा ने सवाल करते हुए कहा, “असल सवाल यह है कि इसे फिर से उठाने के पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है? इसे इतनी जल्दबाजी में क्यों लाया गया है?”
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उन्होंने यह भी संकेत दिया कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना राजनीतिक रूप से विवाद पैदा कर सकता है और इससे कई राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार है, जिसे बिना किसी शर्त के लागू किया जाना चाहिए, जबकि परिसीमन एक अलग संवैधानिक प्रक्रिया है जिसे अलग तरीके से देखा जाना चाहिए।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार इन दोनों मुद्दों को एक साथ जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जबकि इसके व्यापक प्रभावों पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई है।
इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और संसद से लेकर बाहर तक पक्ष-विपक्ष आमने-सामने हैं।
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