वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भविष्य में अपने पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो अंतरों का ही गायन करेगी। यह निर्णय बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की करीब चार घंटे चली बैठक के बाद लिया गया।
कांग्रेस के इस फैसले पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे वोटों के लिए “नई मुस्लिम लीग” तक बता दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर हिंदी में पोस्ट कर कांग्रेस पर भारत माता और देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों का अपमान करने का आरोप लगाया।
नितिन नबीन ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति ने अब वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरों के गायन को औपचारिक रूप से प्रस्ताव के रूप में स्वीकार कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए देश के सम्मान से समझौता किया है।
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वंदे मातरम् पर क्यों बढ़ा विवाद?
केंद्र की बीजेपी सरकार ने सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन को अनिवार्य किया है। कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी राष्ट्रगीत को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। कांग्रेस का कहना है कि वह पहले दो अंतरों का ही गायन करेगी।
यह विवाद 15 अगस्त को उस समय और तेज हो गया, जब कांग्रेस मुख्यालय से वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन का वीडियो वायरल हुआ। बीजेपी ने आरोप लगाया कि राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने कार्यक्रम के दौरान पूरा राष्ट्रगीत बजने से रोकने की कोशिश की। हालांकि, कांग्रेस ने सफाई दी कि सोनिया गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कह रही थीं।
इसके बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने एक-दूसरे पर राष्ट्रगीत के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ था।
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