तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला, जब माकपा (सीपीआई-एम) नेता पी. शनमुगम ने कहा कि यदि तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) सरकार एआईएडीएमके के विद्रोही गुट को मंत्रिमंडल में शामिल करती है, तो वाम दल अपने समर्थन पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
पी. शनमुगम ने कहा कि वाम दलों ने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को इसलिए समर्थन दिया था ताकि राज्य में राष्ट्रपति शासन की स्थिति न बने, क्योंकि इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के “पीछे के रास्ते से प्रवेश” की आशंका बढ़ सकती थी।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में तात्कालिक नए चुनाव की स्थिति नहीं थी और मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से डीएमके और एआईएडीएमके दोनों गठबंधनों को नकार दिया था। ऐसे में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
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पी. शनमुगम ने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान होना चाहिए और किसी भी प्रकार से एआईएडीएमके विद्रोही समूह को मंत्रिमंडल में शामिल करना टीवीके की पारदर्शी शासन की नीति के खिलाफ होगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा, “मुझे नहीं लगता कि टीवीके एआईएडीएमके विद्रोही समूह को मंत्रिमंडल में शामिल करेगी। लेकिन यदि ऐसा निर्णय लिया गया, तो सीपीआई-एम अपने समर्थन पर पुनर्विचार करेगी।”
गौरतलब है कि 4 मई को घोषित परिणामों में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था, लेकिन वह बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई थी।
बाद में कांग्रेस, वाम दलों, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से पार्टी को बहुमत के करीब मजबूती मिली। 13 मई को हुए विश्वास मत में टीवीके को 144 विधायकों का समर्थन मिला, जिनमें 24 एआईएडीएमके विधायक भी शामिल थे, जिन्होंने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर समर्थन दिया था।
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