दलाई लामा ने द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के देशों से बौद्ध भिक्षु, विद्वान और प्रतिनिधि शामिल हुए।
शिखर सम्मेलन के अवसर पर जारी अपने संदेश में दलाई लामा ने कहा कि वे लंबे समय से अपने बौद्ध आध्यात्मिक भाई-बहनों, विशेष रूप से एशिया में, के साथ निकट संबंधों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से उन्हें विभिन्न अवसरों पर उनसे मिलने का सौभाग्य मिला है। हाल ही में उन्होंने छह एशियाई देशों से आए भिक्षुओं से मुलाकात की, जो पाली और संस्कृत अंतरराष्ट्रीय भिक्षु विनिमय कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। उन्होंने ऐसे नियमित आदान-प्रदान को प्रेरणादायक बताते हुए प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।
दलाई लामा ने कहा कि बौद्ध सिद्धांतों में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है, विशेषकर एशियाई समाजों में, जहां ये सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक समुदाय भी बौद्ध दर्शन में गहरी रुचि ले रहा है, खासकर मन और भावनाओं की प्रकृति को समझने के संदर्भ में।
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उन्होंने वैश्विक चुनौतियों जैसे संघर्ष, असमानता, पर्यावरणीय क्षरण और बढ़ते मानसिक तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल तकनीक या भौतिक प्रगति से संभव नहीं है। इसके लिए करुणा, दया और एक अच्छे हृदय का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि करुणा कोई विलासिता नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।
दलाई लामा ने आंतरिक शांति को स्थायी शांति की नींव बताते हुए कहा कि मन के प्रशिक्षण, क्रोध और भय जैसी नकारात्मक भावनाओं को कम करने तथा धैर्य और आत्मअनुशासन के विकास से ही सच्ची शांति संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस शिखर सम्मेलन की सफलता एक अधिक शांतिपूर्ण और मानवीय विश्व के निर्माण में योगदान दे सकती है।
यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन 24–25 जनवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया।
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