दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को हुए रेड फोर्ट कार-बम आत्मघाती हमले, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, से जुड़े मामले में गिरफ्तार डॉक्टरों के समूह को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। सरकारी सूत्रों ने The Indian Witness को बताया कि यह तथाकथित “व्हाइट कॉलर आतंकी मॉडल” दिल्ली और देश के अन्य प्रमुख शहरों में एक वैश्विक कॉफी चेन के आउटलेट्स पर बम धमाके करने की साजिश रच रहा था।
सूत्रों के अनुसार, जिस अंतरराष्ट्रीय कॉफी चेन को निशाना बनाने की योजना थी, उसके संस्थापक यहूदी हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों के जरिए आतंकी समूह इजरायल द्वारा गाजा में की जा रही सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एक प्रतीकात्मक और वैश्विक संदेश देना चाहता था।
इस मामले में गिरफ्तार तीन डॉक्टरों — जम्मू-कश्मीर के मुजामिल अहमद गनई और आदिल अहमद राथर, तथा उत्तर प्रदेश के शाहीन सईद — ने पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को बताया कि उनके समूह के भीतर लक्ष्य को लेकर मतभेद थे। उन्होंने बताया कि आत्मघाती कार हमले को अंजाम देने वाले उमर-उन-नबी, जो हमले में मारा गया, और अन्य सदस्यों के बीच इस बात पर असहमति थी कि किन ठिकानों को निशाना बनाया जाए।
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कुछ सदस्यों का मानना था कि आतंकी गतिविधियों को केवल जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों तक सीमित रखा जाना चाहिए, जबकि अन्य सदस्य दिल्ली और अन्य महानगरों में अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले ठिकानों पर हमला कर व्यापक प्रभाव पैदा करना चाहते थे।
सूत्रों के मुताबिक, यह “व्हाइट कॉलर आतंकी मॉडल” पिछले चार वर्षों से सक्रिय था और पेशेवर पृष्ठभूमि होने के कारण लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा रहा। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों, फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी गहराई से जांच कर रही हैं।
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