थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है। उन्होंने इस्लामाबाद को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में किसी भी तरह की “दु:साहसिक कार्रवाई” का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जाएगा।
2026 की अपनी पहली प्रेस वार्ता में जनरल द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने अपने बलों को पूरी तरह से तैनात कर लिया था और जमीनी सैन्य कार्रवाई शुरू करने के लिए वह पूरी तरह तैयार थी। यह ऑपरेशन 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस हमले को पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया था।
सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने मिसाइल और ड्रोन हमले की कोशिश की, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया। जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के कई हवाई ठिकानों को निशाना बनाया। 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्षविराम की घोषणा की गई।
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जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर स्पष्ट राजनीतिक निर्देशों के तहत तीनों सेनाओं के बेहतरीन तालमेल का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि 7 मई को 22 मिनट की शुरुआती कार्रवाई से लेकर 10 मई तक चले 88 घंटों के ऑपरेशन ने रणनीतिक समीकरण बदल दिए और आतंकवादी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान ने उस दौरान कोई भी गलती की होती, तो भारतीय सेना जमीनी अभियान शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थी। संघर्षविराम के बाद से पश्चिमी सीमा और जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील जरूर है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है।
सेना प्रमुख के अनुसार, 2025 में 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के थे। स्थानीय आतंकियों की संख्या अब एकल अंक में आ गई है और भर्ती लगभग समाप्त हो चुकी है। विकास कार्यों, पर्यटन में वृद्धि और शांतिपूर्ण अमरनाथ यात्रा को उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया।
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