दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील 21 सितंबर को न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे। वकीलों ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 के तहत विवादित ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए लागू संशोधित व्यवस्था के विरोध में यह फैसला लिया है।
दिल्ली की सभी जिला अदालतों की समन्वय समिति ने इस संबंध में निर्णय लिया है। समिति से जुड़े वकीलों का कहना है कि संशोधित तंत्र के कारण ट्रैफिक चालानों से संबंधित मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की मौजूदा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वकीलों के अनुसार, यह विरोध विशेष रूप से उन मामलों से जुड़ा है, जिनमें वाहन चालक या अन्य संबंधित व्यक्ति चालान को चुनौती देते हैं। उनका कहना है कि विवादित चालानों के निपटारे के लिए न्यायिक प्रक्रिया और वकीलों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
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समन्वय समिति ने दिल्ली की जिला अदालतों में कार्यरत वकीलों से 21 सितंबर को न्यायिक कार्य से दूर रहने की अपील की है। इस दौरान अदालतों में नियमित कानूनी कार्य प्रभावित होने की संभावना है।
वकीलों का यह कदम केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में किए गए बदलावों को लेकर उनकी आपत्तियों के बाद सामने आया है। नियम 167 के तहत विवादित ट्रैफिक चालानों के निपटारे की व्यवस्था में संशोधन किया गया है।
वकील चाहते हैं कि संशोधित व्यवस्था के प्रभाव और उससे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि चालान से संबंधित विवादों को पारदर्शी और उचित प्रक्रिया के तहत निपटाया जाना चाहिए।
21 सितंबर को होने वाले इस विरोध के कारण दिल्ली की जिला अदालतों में न्यायिक कामकाज पर असर पड़ सकता है। हालांकि, जरूरी और अत्यावश्यक मामलों को लेकर अदालतों की कार्यप्रणाली अलग हो सकती है।
वकीलों की समन्वय समिति ने अपने निर्णय के जरिए संशोधित चालान तंत्र से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा है और संबंधित अधिकारियों से इस मुद्दे पर विचार करने की मांग की है।
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