दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला और उसके बेटे की भारतीय नागरिकता के लिए याचिका पर विचार करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनका आवेदन स्वीकार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मामले की “असामान्य परिस्थितियों और विशेष तथ्यों” को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।
याचिका उस महिला द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप था कि उसकी ससुराल वालों ने उसकी शादी के बाद धोखाधड़ी करके उसे एक नए नाम से पाकिस्तानी पासपोर्ट जारी करवा दिया। इसके परिणामस्वरूप महिला और उसका बेटा भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने में अड़चन का सामना कर रहे थे।
न्यायाधीश पुरुषेंद्र कुमार कौरव इस याचिका की सुनवाई कर रहे थे। महिला ने केंद्रीय सरकार द्वारा उनके भारतीय नागरिकता आवेदन को खारिज किए जाने के खिलाफ चुनौती दायर की थी। साथ ही उन्होंने अपने पहले के भारतीय पासपोर्ट को बहाल कराने और बेटे की नागरिकता आवेदन पर विचार करने की मांग भी की थी।
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए महिला और उसके बेटे को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का अवसर दिया जाना चाहिए। कोर्ट का यह निर्देश संबंधित अधिकारियों को याचिकाओं पर नयायपूर्ण और संवेदनशील दृष्टिकोण से विचार करने के लिए बाध्य करता है।
इस निर्णय से यह संकेत मिलता है कि अदालत ऐसे मामलों में जहां परिवार और पासपोर्ट से जुड़ी जटिलताएं हों, वहां पीड़ितों को उनकी कानूनी पहचान और नागरिक अधिकार दिलाने के लिए न्यायिक मार्ग अपनाया जाएगा।
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