झारखंड के धनबाद जिले के झरिया स्थित लोदना क्षेत्र में गुरुवार को जोरदार धमाके के साथ जमीन धंसने से हड़कंप मच गया। जमीन में पड़ी गहरी दरारों से जहरीला काला धुआं निकलने के साथ आग की लपटें भी दिखाई दीं। जहरीले धुएं के कारण स्थानीय लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और भय का माहौल है।
यह घटना लोदना क्षेत्र की बरारी नंबर-6 बस्ती में हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध कोयला खनन और जमीन के नीचे बनाई गई कथित सुरंगों के कारण यह हादसा हुआ। सूचना मिलने के बाद बीसीसीएल की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का निरीक्षण किया। प्रबंधन ने प्रभावित स्थान पर भराई कराने का आश्वासन दिया है।
110 वर्षों से सुलग रही झरिया की धरती
झरिया कोयला क्षेत्र में भूमिगत आग का इतिहास करीब 110 साल पुराना है। वर्ष 1916 में यहां आग लगने की पहली घटना दर्ज की गई थी। अवैज्ञानिक खनन, खुली छोड़ी गई खदानों और ऑक्सीजन के संपर्क में आने से कोयले की परतों में स्वतः दहन होता रहा, जिससे आग धीरे-धीरे फैलती गई।
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सरकारी आंकड़ों और विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार, कुछ इलाकों में आग का प्रभाव समय के साथ कम हुआ, लेकिन हालिया रिमोट सेंसिंग अध्ययनों में कई क्षेत्रों में आग के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।
करोड़ों टन कोयला जल चुका
आंकड़ों के मुताबिक झरिया की भूमिगत आग में अब तक करीब 3.7 करोड़ टन कोयला जल चुका है। झरिया कोयला क्षेत्र में देश के बड़े कोकिंग कोयला भंडार मौजूद हैं, लेकिन आग और लगातार हो रहे भू-धंसाव के कारण कई हिस्से खनन के लिए जोखिमपूर्ण हो गए हैं।
आग नियंत्रण, भराई और पुनर्वास पर सरकार ने हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जून 2025 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने संशोधित झरिया मास्टर प्लान को मंजूरी दी, जिसके लिए 5,940.47 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रभावित इलाकों की वैज्ञानिक जांच और आग तथा जहरीली गैसों के खतरे को खत्म करने की मांग की है। साथ ही लक्ष्मी कॉलोनी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भू-धंसाव का दायरा बढ़ सकता है और बस्ती के साथ-साथ आसपास के आवागमन पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
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