नीट (यूजी) परीक्षा में कथित पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए खुद को "एसी कमरे का कार्यकर्ता नहीं, बल्कि सड़क का लड़ाका" बताया। उनका यह बयान संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह के दौरान सामने आया।
संसद परिसर में कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश से मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने पुराने राजनीतिक दिनों को याद किया। बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने उस समय का जिक्र किया जब जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके शासन की सराहना की थी। प्रधान ने कहा कि उसी दौर में जयराम रमेश वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री बने थे, जबकि वे स्वयं पहली बार संसद पहुंचे थे।
इस पर जयराम रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, "ऐसा होता है।" जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "कुछ अपने आप नहीं होता। मैं सड़क का लड़ाका हूं, एसी कमरे का कार्यकर्ता नहीं।"
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शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह धर्मेंद्र प्रधान की पहली सार्वजनिक टिप्पणी है। अपने इस्तीफे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि उन्हें शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने और देश के युवाओं के सपनों को साकार करने का अवसर मिला।
नीट पेपर लीक मामले पर उन्होंने कहा कि सरकार ने तत्काल जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी और दोबारा परीक्षा भी सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई। उन्होंने कहा कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर और देशभर की परिस्थितियों को देखते हुए, राष्ट्रीय एकता बनाए रखने, छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों से बचाने और उन्हें पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देने के उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को अंतरिम शिक्षा मंत्री बनाया गया है। वहीं, सरकार ने परीक्षा में गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए नया एंटी-पेपर लीक कानून पेश किया है। साथ ही शिक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया गया है।
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