कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की परीक्षा और भर्ती को लेकर उठे विवाद के बीच कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार मामले की पूरी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।
शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार व्यापक शिक्षा सुधारों पर काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें विदेशों में मौजूद शिक्षा और रोजगार के अवसरों की जानकारी देना भी है।
केपीएससी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने मामले को लेकर मंत्री प्रियांक खड़गे के इस्तीफे की मांग की है। शिवकुमार ने इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी मामले में जांच सबसे पहले होनी चाहिए और तथ्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
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उन्होंने संकेत दिया कि सरकार आरोपों को गंभीरता से ले रही है और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनी रहे तथा विद्यार्थियों और नौकरी के इच्छुक युवाओं का भरोसा कायम रहे।
शिवकुमार ने शिक्षा के व्यापक सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल राज्य या देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था को बदलती जरूरतों के अनुरूप विकसित करना जरूरी है।
केपीएससी विवाद के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्ष सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। सरकार की ओर से जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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