भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने निजीकरण या भूमिका कम किए जाने से जुड़ी खबरों को पूरी तरह निराधार और गलत बताया है। रविवार को जारी बयान में इसरो ने स्पष्ट किया कि उसका न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही अंतरिक्ष क्षेत्र में उसका महत्व किसी भी तरह कम होगा।
इसरो ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी का उद्देश्य इसरो की भूमिका को कम करना नहीं है। इसके बजाय इससे इसरो को अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष कार्यक्रमों और अत्याधुनिक अनुसंधान पर अधिक मजबूती से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी, जबकि परिपक्व तकनीकों और क्षमताओं का विस्तार उद्योग कर सकेगा।
इसरो ने कहा कि नियमित रूप से निर्मित होने वाली प्रणालियों, परिपक्व प्रक्षेपण यानों और सामान्य उपग्रहों का उत्पादन भविष्य में उद्योगों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के माध्यम से प्रतिस्पर्धी प्रक्रियाओं के तहत बढ़ाया जा सकता है।
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भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने भी इन खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इसरो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की आधारशिला बना रहेगा। इन-स्पेस अंतरिक्ष विभाग के तहत काम करने वाली स्वायत्त संस्था है, जो गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, अनुमति देने और निगरानी करने का काम करती है।
यह स्पष्टीकरण इसरो की नौ कर्मचारी संघों द्वारा अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन को भेजे गए पत्र के बाद आया। पत्र में 21 अगस्त को गोयनका की उन कथित टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिनमें कहा गया था कि भविष्य में इसरो प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा।
गोयनका ने स्पष्ट किया कि इसरो अग्रणी अनुसंधान और राष्ट्रीय मिशनों का नेतृत्व करता रहेगा। इनमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, 2040 तक भारतीय मानवयुक्त चंद्र मिशन, नई पीढ़ी के प्रक्षेपण तंत्र तथा चंद्र और ग्रहों की खोज जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शामिल हैं।
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