तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) ने गुरुवार को विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राज्य में नई सरकार के गठन में लगातार देरी हो रही है और राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है।
बैठक के बाद नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तमिलनाडु की राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना था कि भाजपा नेतृत्व, विशेषकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्य की राजनीतिक स्थिति में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) को जनता ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुना है, इसलिए संवैधानिक परंपरा के अनुसार उसे सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए। नेताओं ने आरोप लगाया कि संवैधानिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
और पढ़ें: तमिलनाडु में सरकार गठन की तैयारी, विजय कल सुबह 10 बजे ले सकते हैं मुख्यमंत्री पद की शपथ
डीएमके और उसके सहयोगी दलों ने स्पष्ट किया कि वे राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए और सरकार गठन में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में मौजूदा स्थिति आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक टकराव को जन्म दे सकती है। वहीं, विपक्षी दल केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच अब सभी की नजर राज्यपाल और आगामी राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई है।
और पढ़ें: तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK गठबंधन टूटा, TVK के साथ नए राजनीतिक समीकरण