भारत की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देने के लिए नीति आयोग ने DPI@2047 रोडमैप पेश किया है, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के अगले चरण की विस्तृत रूपरेखा दी गई है। इस पहल का उद्देश्य समावेशी और उत्पादकता आधारित आर्थिक विकास को गति देना है।
इस रोडमैप को सुमन बेरी और अजय कुमार सूद द्वारा वरिष्ठ नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों की मौजूदगी में लॉन्च किया गया। इसे एकस्टेप फाउंडेशन और डेलॉइट के सहयोग से तैयार किया गया है।
इस रणनीति में दो चरणों का प्रस्ताव है—DPI 2.0 (2025-2035), जो रोजगार और आजीविका आधारित विकास पर केंद्रित होगा, और DPI 3.0 (2035-2047), जिसका उद्देश्य व्यापक समृद्धि सुनिश्चित करना है। DPI 2.0 के तहत एमएसएमई, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, क्रेडिट, ऊर्जा और सामाजिक सुरक्षा जैसे आठ प्रमुख क्षेत्रों में बदलाव की योजना बनाई गई है।
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यह पहल आधार और यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म पर आधारित पहले चरण से आगे बढ़ते हुए अब उत्पादकता, बाजार पहुंच और रोजगार सृजन पर जोर देती है।
कार्यक्रम के दौरान सुमन बेरी ने कहा कि अब आर्थिक नीति का फोकस उत्पादकता बढ़ाने पर है, क्योंकि इससे आय और जीवन स्तर में सुधार संभव है। वहीं अजय कुमार सूद ने कहा कि तकनीकी नवाचार को बड़े स्तर पर लागू करना और उसे सार्वजनिक हित में बदलना भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि DPI 2.0 वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करने में मदद कर सकता है। उन्होंने बताया कि भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता के कारण महंगाई और वित्तीय दबाव बढ़ता है, जिसे डिजिटल दक्षता से संतुलित किया जा सकता है।
इस रोडमैप के तहत जिला स्तर पर क्रियान्वयन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और डेटा आधारित सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। 2026-27 से एमएसएमई और कृषि क्षेत्रों में पायलट परियोजनाएं शुरू होने की संभावना है।
DPI@2047 योजना भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप तैयार की गई है, जिसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का प्रमुख आधार माना गया है।
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