प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब में सरकारी अधिकारियों के कथित ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में पंजाब पुलिस को भेजे गए सात पत्रों और अन्य दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सामने रखा है। मामले में अगली सुनवाई 3 सितंबर को निर्धारित है।
ईडी के मुख्य आरोपों के अनुसार, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन कथित तौर पर अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियों से जुड़े एक रैकेट का नेतृत्व कर रहे थे। इसमें आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित कथित लेनदेन भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में जांच जारी है।
यह मामला अधिवक्ता निखिल सराफ की याचिका से भी जुड़ा है। याचिका में वरिष्ठ अधिकारियों की कथित संलिप्तता वाले कई मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें ‘कैश फॉर ट्रांसफर’, अनुकूल नीतियां हासिल करने के लिए कथित भुगतान और टेंडर से जुड़े आरोप शामिल हैं।
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हाईकोर्ट के 27 अगस्त के निर्देश के बाद ईडी ने अपनी ओर से पंजाब पुलिस और अन्य अधिकारियों को भेजे गए पत्र, रिपोर्ट, रिमाइंडर और ईमेल अदालत में पेश किए। एजेंसी के मुताबिक, पहला पत्र 30 जुलाई को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत भेजा गया था। इसके बाद 31 जुलाई को रिपोर्ट तैयार की गई।
ईडी ने 7 अगस्त को स्पीड पोस्ट से एक और पत्र भेजा और उसी दिन कार्रवाई की मांग करते हुए रिमाइंडर ईमेल भी किया। डाक ट्रैकिंग रिकॉर्ड के अनुसार यह पत्र 17 अगस्त को पहुंचा।
ईडी ने पहले पंजाब पुलिस से निजी व्यक्ति नितिन गोहल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया था। एजेंसी का आरोप था कि इन लोगों ने सरकारी कामकाज को प्रभावित करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।
पंजाब पुलिस की ओर से 28 अगस्त को एआईजी (जांच), पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने ईडी को पत्र भेजकर अतिरिक्त जानकारी मांगी। यह पत्र 29 अगस्त को ईमेल और 30 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से ईडी को मिला। हालांकि, ईडी का कहना है कि उसे एफआईआर दर्ज होने की कोई सूचना नहीं दी गई।
इसके बाद ईडी ने 31 अगस्त को फिर पत्र भेजा और 1 सितंबर को ईमेल तथा व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज सौंपे। इनमें नितिन गोहल का पीएमएलए के तहत दर्ज बयान, संबंधित दस्तावेज और प्रमाणपत्र शामिल थे।
अब ईडी ने हाईकोर्ट से अपने पत्राचार को रिकॉर्ड पर लेने और मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
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